“MUZAFFAR NAGAR-THE BURNING LOVE” releasing on 17thNovember 2017.

Sohel F Fidai

IMG-20171015-WA0069.jpgI want to clear all confusions –Producer Manoj Kumar Mandi

With hard work of approximately one and a half year Hindi film “Muzaffarnagar-The Burning Love” which is based on riots of year 2013, is now censored and going to release on 17th November 2017. A businessman by profession producer Manoj Kumar Mandi is witness of the riots and he feels it is very necessary to clear all confusion between societies, and to bring love and affection between them. For this he decided to pen the story and make this film, Manoj even took lots of pain in selection of artists, so that they can justify the characters thus Dev Sharma, Aishwarya Devan, Ekanksh Bhardwaj, Anil George and Musraleen Qureshi were selected to play main characters.IMG-20171015-WA0068

Director Harish Kumar said that this film is based on riots of Muzaffarnagar in 2013, where between violence there was a love story also between two lovers, so this film is also a emotional film.

Film is made under the banner of ‘Morna Entertainment Private Limited’, music by Manoj Nayan, Rahul Bhatt and Faraz Ahmed.

When producer Manoj Kumar Mandi was asked that how does he got this idea to make this realistic film? He said due to his business work he always travels in various states of India, and he noticed various opinions between common man on Muzaffarnagar riots, Muslims were thinking there community has suffered, whereas Hindus were thinking the same thing, then this thought came in my mind that everyone should know the reality, otherwise these thought is harmful for our country and thus this thought was born to make a film which is the easiest way to convey message.

What is your main intention behind this film?

Manoj said “I want to convey a message to our fellow Indians, I want to tell everyone that the gossips and wrong information spread due to riot of 2013 is not true, there is no enmity between Hindu and Muslims, I was present during that time, yes there was some violence but it was due to some misunderstanding, otherwise everyone are together there in Muzaffarnagar. I have seen love and affection between both communities, so this is the main reason behind making of this film. Even censor board didn’t objected anything in this film, yes they suggested to rectify its title, that we did, director Harish Kumar’s vision was absolutely clear, he has handeled entire subject very delicately.

“मुज़फ्फरनगर-दी बर्निंग लव” १७ नवंबर २०१७ में प्रदर्शित हो रही है।

गलत फहमियों को दूर करना चाहता हूं- मनोज कुमार मांडी

 

लगभग डेढ़ वर्ष के अथक परिश्रम के पश्चात साल 2013 के दंगों पर आधारित फिल्म मुजफ्फरनगर द बर्निंग लव सेंसर होकर 17 नवंबर 2017 में प्रदर्शन के लिये तैयार है। पेशे से बिजनसमैन मनोज कुमार के जेहन में मुजफ्फरनगर में हुए दंगे के बाद लोगों के बीच फैले मनमुटाव को फिर से आपसी प्यार में बदलने के लिये फिल्म बनाने का फैसला किया। दिलचस्प बात यह है कि फिल्म के निर्माता ही लेखक भी हैं। उन्होंने किरदारों का चुनाव भी बड़े सटीक ढंग से किया है, फिल्म के किरदार कुछ इस प्रकार हैं जिनमें देेव शर्मा, एश्वर्य दिवान, एकांष भारद्वाज, अनिल जार्ज, मुस्र्लीन कुरैशी जैसे कलाकार शामिल हैं।

 

फ़िल्म के निर्देशक हरीश कुमार ने बताया कि यह फ़िल्म २०१३ को मुज़फ्फरनगर में घटित एक दुर्घटना पर आधारित होते है, यह हिंसक घटनाओ के बीच में दो दिलों के प्यार की भावनात्मक कहानी है, जो २०१३ के दंगे पर आधारित होते हुए भी दर्शकों को एक महत्वपूर्ण संदेश देती है,

 

फिल्म का निर्माण मोरना एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड के बैनर तले हुआ है। जबकि फिल्म में संगीत मनोज नयन, राहुल भट्ट और फराज अहमद का है। आपको मुजफ्फरनगर दंगा 2013 पर फिल्म बनाने का ख्याल कैसे आया? मैं बिजनसमैन हूं, व्यापार के सिलसिले में अलग अलग प्रदेशों में जाता रहता हूं। मैने देखा कि लोगों में इस दंगे के बाद अलग-अलग भावनाएं देखने को मिल रही हैं। अगर कोई मुस्लिम है तो वह यह सोच रहा है कि वहां पर हमारे लोगों के साथ बुरा बर्ताव हुआ और यदि हिंदु है तो वह भी यही सोच रहा है। बस इसी को ध्यान में रखते हुए मैने सोचा कि क्यों न इस पर एक फिल्म बनाई जाए। लोगों में जो गलतफहमियां फैली हुई हैं उन्हें दूर किया जाये। क्योंकि आपसी मनमुटाव देश के लिये हानिकारक हो सकता है उसे कैसे दूर किया जाये। फिर मुझे लगा कि फिल्म के माध्यम से यह काम किया जा सकता है।

 

इस फिल्म को बनाने का मुख्य उद्देश्य क्या रहा है आपका? फिल्म बनाने का मेरा उद्देश लोगों को संदेश देना है। मैं इस फिल्म के माध्यम से न केवल उस प्रदेश के लोगों को बताना चाहता हूं बल्कि दूसरे प्रदेश के लोगों को भी बताना चाहता हूं, दिखाना चाहता हूं कि 2013 में जो दंगा हुआ जैसा लोगों के बीच में अफवाहें फैली कि वहां हिंदु-मुस्लिम एक दूसरे के दुश्मन हो चले हैं ऐसा कुछ नहीं है। बल्कि वहां लोग एक दूसरे के साथ मिलकर खुशी-खुशी जीवन यापन कर रहे हैं। हां यह अलग बात है कि दंगे के दौरान कुछ हादसे हुये, जिससे लोगों को विश्वास होने लगा कि वही सही है पर ऐसा नहीं है। मैं दंगे के वक्त वहीं पर था मैं लोगों में आपसी भाईचारा देखा। इस फिल्म के माध्यम से मैं उसी भाईचारे को दिखाना चाहता हूं, उसी आपसी प्यार को दिखाना चाहता हूं। जब मैने फिल्म बनाने के बारे में सोचा तो यह भी ख्याल आया कि दर्शकों को हम कैसे अपनी तरफ खीचेंगे। फिर मैने प्यार की बात की लेकिन संदेश को ध्यान में रखते हुए। सेंसर बोर्ड ने फिल्म के किसी भी सीन या संवाद को लेकर कोर्ई आपत्ति नहीं जताई। हां टायटल को लेकर उन्होंने एक सुझाव दिया था कि हो सकता है कि इससे आपको कोई परेशानी हो सकती है। इसलिये हमने टायलट को उनके सुझाव पर बदल दिया और किसी प्रकार की कोई परेशानी हमें बोर्ड की तरफ से नहीं हुई। फिल्म निर्देशक हरीश कुमार  का विजन बिलकुल साफ है। किस चीज को कैसे करना है यह उन्हें बहुत अच्छी तरह आता है।

 

Thanks & Regards

 

Wasim Siddique

 

Fame Media

Cell :09892222175

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Blog at WordPress.com.

Up ↑

%d bloggers like this: